नया संघर्ष करने वाली भारत की 10 प्रथम महिलाएँ First Woman in India

आज महिलाएँ किसी काम में पुरुषों से पीछे नही है।महिलाएँ आज पुरुषों के कदमो से कदम मिलाकर साथ चल रही है और भारत देश के विकास में योगदान दे रही है।

आज हम भारत देश की उन महिलाओं के बारे में जानेंगे जिन्होंने नया संघर्ष करके यह साबित कर दिया कि वे पुरुषो से कम नही है।

इन महिलाओ ने नया करने का साहस किया। और संघर्ष कर पाया मुकाम।

नया संघर्ष करने वाली भारत की 10 प्रथम महिलाएँ First Woman in India

1 मंजू यादव , कुली

पति की मौत के बाद तीन बच्चों की परवरिश मुश्किल हुई तो मंजू यादव उसी पेशे में उतर आई जो उनके पति का था। मंजू यादव पिछले पांच साल से ये काम कर रही हैं।ये देश की प्रथम महिला कुली है।इन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया है।

 

2 जमिता, इमाम

26 जनवरी  को केरल के मल्लपुरम में जमिता ने जुम्मे की नमाज में इमाम की भूमिका निभाई। वे जिले के वंदूर शहर में कुरान सुन्नत सोसाइटी की महासचिव है।

3 ममता देवी, बॉडीबिल्डर

मणिपुर  की ममता देश की पहली महिला बॉडीबिल्डर है। वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग चैम्पियनशिप-2012 में वे कांस्य पदक जीत चुकी है।

4 सीमा राव, कमांडो ट्रेनर

मिलिट्री मार्शल आटर्स में सेवंथ डिग्री ब्लैक बेल्ट सीमा राव देश की एकमात्र महिला कमांडो ट्रेनर है। सीमा राव 20 साल से बिना फीस स्पेशल प्रशिक्षण दे रही है।

5 चंद्राणी प्रसाद वर्मा, माइनिंग इंजीनियर

महाराष्ट्र की चंद्राणी प्रसाद वर्मा को माइनिंग इंजीनियर के डिग्री कोर्स में एडमिशन देने से इंकार कर दिया था। कोर्ट के आदेश पर प्रवेश मिला । 1999 में वे देश की पहली महिला माइनिंग इंजीनियर बनी।

6 अवनी चतुर्वेदी, फाइटर पायलट

अकेले फाइटर प्लेन उड़ाने वाली देश की पहली महिला अवनी चतुर्वेदी । मध्यप्रदेश के रीवा की 24 वर्षीय अवनी चतुर्वेदी ने यह इतिहास 21 फरवरी 2018 को रचा है। वे 2016 में लड़ाकू दस्ते में आई थी।

7 टेसी थॉमस, मिसाइल डेवलपर 

भारतीय मिसाइल प्रोजेक्ट की प्रमुख बनने वाली पहली महिला टेसी थॉमस। अग्नि-4 तथा अग्नि-5 के विकास में केरल की टेसी थॉमस का अहम योगदान रहा।

8 अलीशा अब्दुल्ला, रेसिंग ड्राइवर 

चेन्नई की अलीशा अब्दुल्ला ने 14 साल की उम्र में नेशनल कार रेसिंग में पुरुषो के बीच पांचवां स्थान पाया था।19 की उम्र में बाइक रेसिंग में तीसरा स्थान पाया।

9 के. सी. रेखा , लाइसेंस्ड फिशरवुमन

35 साल की उम्र में यह काम चार बच्चों की परवरिश में पति का हाथ बंटाने के लिए शुरू किया। वे देश की एकमात्र ऐसी फिशरवुमन है, जिनके पास लाइसेंस है।

10 सुरेखा यादव, लोकोपायलट

सुरेखा यादव 1988 में रेलवे में भर्ती हुई थी । 1989 में वे असिस्टेंट ड्राइवर बनी और 2010 में पैसेंजर ट्रेन की ड्राइवर। सुरेखा यादव कल्याण में ड्राइवर्स को ट्रेनिग देती है।

 

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