धनतेरस का इतिहास, कथा और महत्व। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस। Dhanteras festival in hindi

धनतेरस का इतिहास, कथा और महत्व। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस। Dhanteras festival in hindi

 

 

कार्तिक कृष्ण पक्ष  की त्रयोदशी को हम धनतेरस(Dhanteras festival) के रूप में मनाते हैं। इसी दिन को हम धन्वंतरी जयंती के रूप में भी मनाते हैं। मान्यता है कि इसी चिकित्सा पद्धति के जनक धनवंतरी समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस दिन नए बर्तन खरीदना शुुुभ माना जाता है। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज महाराज की भी पूजा की जाती है।

किसके पुत्र थे धन्वन्तरि महाराज?

धन्वन्तरि महाराज ईसा से लगभग दस हजार वर्ष पूर्व हुए थे। धन्वन्तरि महाराज काशी के राजा महाराज धन्व के पुत्र थे। धन्वन्तरि महाराज ने शल्य शास्त्र पर महत्वपूर्ण गवेषणाएँ की थी। उनके प्रपौत्र दिवोदास ने उन्हें परिमार्जित कर सुश्रुत आदि शिष्यों को उपदेश दिए। इस तरह सुश्रुत संहिता किसी एक का नही , बल्कि धन्वन्तरि, दिवोदास और सुश्रुत दिनों के वैज्ञानिक जीवन का मूर्त रूप है।

अमृत का वैज्ञानिक प्रयोग:-

बताया जाता है कि धन्वन्तरि महाराज के जीवन का सबसे बड़ा वैज्ञानिक प्रयोग अमृत का है। उनके जीवन के साथ अमृत का स्वर्ण कलश जुड़ा है। उन्होंने अमृत निर्माण करने का प्रयोग स्वर्ण कलश में ही बताया था। धन्वन्तरि महाराज ने कहा कि जरा मृत्यु के विनाश के लिए ब्रह्मा आदि देवताओं ने सोम नामक अमृत का आविष्कार किया। सुश्रुत में उनके रासायनिक प्रयोग के उल्लेख है। धन्वन्तरि सम्प्रदाय में 100 प्रकार की मृत्यु है, जिनमे से एक ही काल मृत्यु है, शेष अकाल मृत्यु को रोकना ही निदान और चिकित्सा है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस:-

धनतेरस को धन्वन्तरि महाराज की जयंती है । इस दिन धन्वन्तरि महाराज का जन्म हुआ था। चूंकि धन्वन्तरि महाराज देवताओं के डॉक्टर है और इस दिन डॉक्टरों के द्वारा धन्वन्तरि महाराज की पूजा की जाती है। इसलिए भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने के घोषणा की।

धनतेरस की कथा (Dhanteras story)

प्राचीन युग में हेम नाम के एक राजा थे उनकी कोई संतान नहीं थी बहुत मानता मानने के बाद देवताओं की कृपा से उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। जब उन्हें पुत्र की कुंडली बनवाई तब ज्योतिष ने कहा इस बालक की शादी के दसवे दिन इसकी मृत्यु का योग है। यह सुनकर राजा के पुत्र की शादी ना करने का निश्चय किया और उसे एक ऐसी जगह भेज दिया जहां कोई स्त्री ना हो ,लेकिन तकदीर आगे किसी की नहीं चलती। जंगल में राजा के पुत्र को एक सुंदर कन्या मिली जिससे उन्हें प्रेम हो गया और दोनों ने गंधर्व  विवाह कर लिया। भविष्यवाणी के अनुसार राजा के पुत्र की दसवें दिन मृत्यु का दिन आ गया। उसके प्राण लेने के लिए यमराज के दूत यमदूत पृथ्वीलोक पर आ गए। जब प्राण ले जाने लगे तो मृतक की विधवा के विलाप करने का दुःख यमदूत को अपने मन में अनुभव हुआ, लेकिन क्या करे वह यमदूत अपने कर्तव्य के आगे विवश था। जब प्राण लेकर यमदूत यमराज के पास गए तो बेहद दुःखी थे। तब यमराज ने कहा कि दुखी होने स्वभाविक है, लेकिन हम इसके आगे विवश है।

तब यमदूत ने यमराज से पूछा कि हे राजन ! इस अकाल मृत्यु को रोकने का कोई उपाय नही है क्या?

यमराज ने कहा:- अगर मनुष्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन संध्याकाल में अपने घर के द्वार पर एवं दक्षिण दिशा में दीपक जलायेगा तो उस मनुष्य की अकाल मृत्यु का योग टल जाएगा।

यही कारण है कि धनतेरस के दिन यमराज की पूजा की जाती है।

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