कृष्ण भगवान के प्रेरक प्रसंग Achhiguide.com

कृष्ण भगवान के प्रेरक प्रसंग

Inspirational theme of Krishna God

एक बार अर्जुन को अहंकार हो गया की वही भगवन श्री कृष्ण के सबसे बड़े भक्त है।

श्री कृष्णा को इसका एहसास हो गया था। वे एक दिन अर्जुन को अपने साथ घुमाने ले गए। रास्ते में उनकी मुलाक़ात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर पर तलवार लटक रही थी।

अर्जुन ने उस ब्राह्मण से पूछा-” आप तो जीव हिंसा के भय से सूखी घास खाकर अपना गुजारा करते हैं। फिर तलवार आपके हाथ में कैसे?”

ब्राह्मण बोला-” चार लोगो को में दंड देना चाहता हूँ।”

सबसे पहले तो मुझे नारद जी की तलाश है। वे मेरे प्रभु को आराम नही करने देते।

फिर में द्रौपदी पर भी बहुत क्रोधित हूं। उन्होंने मेरे प्रभु को ठीक उसी समय पुकारा, जब वे भोजन करने बैठे थे। उसकी धृष्टता तो देखिये । उसने मेरे भगवन को जूठा खाना खिलाया।

अर्जुन ने पूछा-” आपका तीसरा शत्रु कोन है?”

ब्राह्मण ने कहा-” वह है ह्र्दयहीन प्रह्लाद।”

उस निर्दयी ने मेरे प्रभु को गरम तेल के कड़ाह में डलवाया। हाथी के पैरों तले कुचलवाया और अंत में खम्भे से प्रकट होने के लिए विवश किया।

…..और चौथा शत्रु है अर्जुन । उसकी दुष्टता देखिये।

उसने मेरे भगवन को सारथि बना डाला। कितना कष्ट हुआ होगा मेरे प्रभु को। यह कहते कहते ब्राह्मण की आँखों में   आंसू गये।

यह देख अर्जुन का घमंड चूर चूर हो गया।

उसने श्री कृष्ण से क्षमा मांगते हुए कहा, ” मान गया प्रभु इस संसार में न जाने कितने तरह के भक्त है । मैं तो कुछ भी नहीं हूं।

किसी को किसी भी प्रकार का घमंड नही करना चाहिए। क्योंकि जिस प्रकार अर्जुन का घमंड श्री कृष्ण ने तोड़ा उसी प्रकार हमारा भी भगवन तोड़ देते है।

आपको यह श्री कृष्ण भगवान का प्रेरक प्रसंग कैसा लगा । अपनी राय जरूर दे।

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